..कृष्ण, प्रेम, माया
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ले चल ओ मेरे कान्हा!फिर उसी जमुना के तीर
अधर धर सुमधुर बंशी बजादे, ज्यों चले मलय समीर ।

करबहियां के हार डाल कर आ मिल झूमें जमुना तीर
नैनन छवि अविरल मनमोहन प्रेम पगे तेरे रूप निरंतर।

तन मन सब सुध हूँ खोई हृदय। रंग हुआ विह्वल
प्राण तान निश्छल सांसों पर छेडो फिर प्रणय गीत ।

बेसुध मधुवन अधीर हैं गोपियां मलिन आम्रकुंज की डाल
बिखरा दो पय प्रेम सुधारस भर दो तरूवर पुहूप समीर।

जगत छाई घनघोर कालिमा खतरे में पडी है मानवता
कष्ट हरो गिरधारी ओ नटवर बनकर रक्षक धर्म धीर।

ओ नटवर कृष्ण मुरलीधर आ। ले चल जमुना तीर
भक्त के रस रंग में डूबा जग है तेरे चरण कमल बलबीर ।

किरण पाण्डेय
मौलिक गोरखपुर उत्तर प्रदेश

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