दिग्पाल छँद

221 2122 221 2122

देखो कभी न मन मे कोई मलाल रखना।
दिल प्यार से भरा हो नेकी कमाल रखना।

खामोश रह अभी तुम अखबार ढूढ़ लेगा
जब नेक सुर्खियां बोले तब बवाल रखना।

बंजर जमीं दिखे तो सावन से झूम जाना
प्यासे चले न बादल अपना सवाल रखना।

पत्थर लगे न बचना आंखे न होते इसकी
देना न चोट खाने दिल का खयाल रखना।

आंधी भरी फ़िजां हो या धूप चांदनी हो
हर हाल दोस्त दिल तुम अपना जलाल रखना।

बन मौत को पहेली ममता चलो अकेली
जीना न खौफ में ठोकर में काल रखना।

गर जल रहा कही पे दिल सादगी से तेरी
मजबूत तब कदम से डगमग न चाल रखना।
ममता✍️

By admin

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