जाने कौन सी मुलाकात आखिरी होगी,
जाने कौन सी रात आखिरी होगी,

इल्म नहीं है अभी, उससे मिलन का
फिर न जाने कौन सी बात आखिरी होगी,

आंखों को है सुकून जिसके दीदार से,
एक दफ़ा मिलन की ग़ुर्बत आखरी होगी,

जिसका स्पर्श है इलाज हर मर्ज़ का,
उसके बिन जीवन की इबारत आखरी होंगी,

घड़ी दो घड़ी बस साथ है मांगा,
तुम न मिले तो मेरी इबादत आखिरी होगी।

दिव्या G.

इबारत (रचना)
ग़ुर्बत (परेशानी)

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