मेरी कविता….
मेरे मन का आइना है,
कभी यथार्थ, कभी कल्पना है
शब्दों से उकेरती हूँ पंक्तियां,
जैसे जीवन की कोई गतिविधियाँ|
मेरी कविता…
मेरे सपनों को देती है उड़ान,
समाज को सुन्दर पैगाम
अल्फ़ाज़ों के है निशान,
मेरी कविता मेरी पहचान |
मेरी कविता…
मेरे हृदय की है मीमांसा,
मेरे कलम की है पिपासा,
उर्जा से ओत-प्रोत है,
मेरी लेखनी को करती सक्रीय,
कविताएं है मुझे बेहद प्रिय |

दिव्या देशमुख
किरन्दुल (छत्तीसगढ़)

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