शब्दों के मोती की माला बनकर,
अहसासों में उतर जाती है,
दिल में जो जज़्बात है,
वो लेखनी में उतर आती है…
ये कविता है जो दिल के अहसास बनकर
पन्नों में उतर जाती है।।

जब दिल कोई दुखा जाता है,
अपने शब्दों के तीरों से घायल कर जाता है,
हम अपने दिल का हाल ना क़ह पाते है,
बस मन को कचोटते रह जाते है…
तब अहसास कविता बन निकल आते है
तब शब्द मन की भड़ास निकाल पाते है..
ये कविता ही मन हलका कर जाती है
जो दिल के अहसास बनकर
पन्नों में उतर जाती है।।

जब दिल में प्यार का अहसास उतर आता है,
दिल किसी को बेइंतहा चाहता है,
दिल के यही जज़्बात जब शब्दों में उतरते है,
ये शब्द ही कविता का क़ाम करते है..
कहते है अहसासों का कोई रूप नहीं होता।
एक कविता ही सम्पूर्ण अहसास बन जाती है,
दिल के अहसास बनकर
पन्नों में उतर जाती है।।

प्रियंका दक्ष

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