मन में उठते- गिरते लहरों को
शब्दों में बांधा है।
छन्दों को सजा सुर में
पिरोया है।
फिर उसे’ रस’ में
डुबोया है।
मन के भावों को
कविता में संजोया है।
नव प्रसंग,नव प्रस्तुति
पन्नों पर उकेरा है।
हर पहलू,हर दृश्य से
नव चेतना जगाया है।
इतिहास, अतीत को
खुद में बसाया है।
भविष्य के आलेखों
को लेखनी में गूंथने को
पलकें बिछाया है।
रिमझिम रानी ✍️
मुजफ्फरपुर बिहार

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