“हमें बोलना होगा”

बरसों पुराना ये मौन हमें अब तोड़ना होगा,
बहुत कुछ ना सही पर अब हमें बोलना होगा,

नम है आंखें और भीगे हैं जज़्बात कई,
पर अश्कों के इस सैलाब को अब हमें रोकना होगा,

बेवक्त तो खड़ा था इक हुजूम साथ मेरे,
वक्त जरूरत खुद ही फासला ये तय अब करना होगा,

हर बात दिल को छू जाती थी कल तक हमें,
अब जिंदगी को आसान, खुद को बदलना होगा,

मैं बीते कल में खुश था और इत्मीनान कल पर भी है,
हां, वक्त की चाल को हमें थोड़ा रुककर समझना होगा

दिव्या G.

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